इन्फेक्शियस बर्सल डिज़ीज़ (IBD), जिसे आमतौर पर गम्बोरो कहते हैं, छोटे चूज़ों का वायरल रोग है। यह बर्सा ऑफ़ फैब्रिशियस पर हमला करता है — वह अंग जहाँ छोटे पक्षियों में एंटीबॉडी बनाने वाली कोशिकाएँ विकसित होती हैं। नतीजा सिर्फ़ मौतें नहीं, बल्कि कमज़ोर इम्यूनिटी वाला झुंड है।
यह इतना महत्वपूर्ण क्यों है
- सीधा नुकसान — अचानक मौतें, आमतौर पर लगभग 3–6 सप्ताह की उम्र में।
- इम्यूनिटी कमज़ोर होना — बहुत जल्दी संक्रमित चूज़ों में कम लक्षण दिखते हैं, पर उनकी इम्यूनिटी खराब हो जाती है। वे अन्य वैक्सीन (जैसे रानीखेत) पर कम प्रतिक्रिया देते हैं और ई. कोलाई व अन्य संक्रमणों से जल्दी बीमार होते हैं।
- मज़बूत वायरस — यह शेड और बिछावन में महीनों तक जीवित रहता है और कई सामान्य कीटाणुनाशकों से नहीं मरता, इसलिए एक बार फार्म पर आने के बाद टिक जाता है।
लक्षण
- सुस्त, पंख फुलाए पक्षी; हिलने-डुलने से बचना
- सफ़ेद, पानी जैसे दस्त; मलद्वार के पंख गंदे
- मलद्वार पर चोंच मारना
- कुछ दिनों में मौतों में तेज़ बढ़ोतरी, फिर सुधार
- पोस्टमार्टम में: सूजा हुआ, बदरंग या खून वाला बर्सा, और जाँघ व सीने की मांसपेशियों में खून के धब्बे
वैक्सीनेशन और मातृ एंटीबॉडी
चूज़ों को अंडे के ज़रिए अपनी माँ से सुरक्षात्मक एंटीबॉडी मिलती हैं। ये मातृ एंटीबॉडी शुरुआत में बचाती हैं, लेकिन बहुत जल्दी दी गई लाइव गम्बोरो वैक्सीन को भी निष्क्रिय कर देती हैं। बहुत जल्दी वैक्सीन दें तो बेकार जाती है; बहुत देर से दें तो फ़ील्ड वायरस पहले पहुँच सकता है।
इसीलिए IBD वैक्सीन का समय ब्रीडर झुंड के वैक्सीनेशन और, बेहतर हो तो, एक दिन के चूज़ों की ब्लड टेस्टिंग के आधार पर तय किया जाता है। अलग-अलग प्रकार की वैक्सीन — इंटरमीडिएट, इंटरमीडिएट-प्लस आदि — आपके फार्म पर संक्रमण के स्तर के अनुसार चुनी जाती हैं।
फार्म की सफ़ाई
- हर झुंड के बीच पूरी सफ़ाई, धुलाई और IBD वायरस पर असरदार कीटाणुनाशक से कीटाणुशोधन
- पुराना पूरा बिछावन हटाना और पर्याप्त खाली समय (डाउनटाइम)
- जहाँ संभव हो, ऑल-इन ऑल-आउट पद्धति
मुख्य बातें
- गम्बोरो सिर्फ़ जान नहीं, इम्यूनिटी को नुकसान पहुँचाता है
- वैक्सीन का समय मातृ एंटीबॉडी पर निर्भर
- वायरस शेड में टिकता है — झुंडों के बीच सफ़ाई बेहद ज़रूरी
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